नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!
नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

06 March, 2015

लगता है कोई है कहीं ....!!

मेरी उम्मीद  के अनघ सुरों में,
कुछ शब्द गढ़ते हैं भाव ,
भरते हैं रंग ,
उड़ता है फाग ,
बसंत का अनुराग ,
 वही है रंग ,
अबीर गुलाल सा ......
खिलता पलाश ....!!

रचना रचती है ,
 रंग से भरी
उमंग से भरी ,...
होली ...!!
और तब ..
धरा के कण कण में,
फूलों के अनेक रंगों में,
खिलती  है ,
खिलखिलाती है ज़िंदगी ,
हाँ .......
लगता है कोई है कहीं ....!!


आप सभी को होली की अनेक शुभकामनायें ...रंग से उमंग से जीवन भरा रहे ...!!

05 March, 2015

यूं ही अनवरत .....!!

15 वर्ष यकीनन बहुत लंबा समय होता है ...किन्तु सब कुछ आज भी याद है ...स्पष्ट ...!!
माँ की याद में ...आज उनकी पुण्यतिथि पर ,उनके लिए लिखे कुछ भाव ...!!


मेरे पास आज भी
 तुम्हारे दिये हुए
देखो वही शब्द हैं माँ
वही भाव हैं ...
जिन्हें तुम सर्दी में सहेजती थीं 
धूप दिखाकर ....,
गर्मी में सहेजती थी 
उस अंधेरी कोठरी  में 
धूप से बचा कर ....
बरसात मे  तुम्ही ने सिखाई बनाना 
वो कागज़ की नाव ,
जिस पर आज भी 
तिरते हैं मेरे मन के भाव
''वो कागज़ की कश्ती वो बारिश का पानी '' 
गाते हुए ....जानती हूँ ....
मानती भी हूँ .......
तुम से मुझ तक ...
मुझ से मेरी संतति तक ....
कुछ तो है जो चलता रहेगा ....
यूं ही अनवरत .....!!

04 March, 2015

बूंद रंग अपने भरोगे ...


शब्द की उस आकृति को
भाव की उस स्वकृति  को ,
शब्द शब्द गढ़  दूँ अगर तो
भाव कैसे पढ़ सकोगे .....?

जीवन  की यह वेदना है ,
जब नहीं संवाद न संवेदना है ,
शब्द मेरे ही हों किन्तु
भाव रंग अपने भरोगे...!!

है जगत की रीत यह तो ,
दो घड़ी की प्रीत यह तो,
जल भरा यह कलश मेरा ,
भाव रंग अपने भरोगे ....!!

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स्याही से
लिखते हुए
उज्ज्वल भाव भी
स्याह क्यों दिखते हैं ......?




28 February, 2015

वो है ज़रूर .....!!

नहीं ,
कोई आवाज़ नहीं है उसकी ,
न ही कोई रंग है ,
नहीं ,
कोई रूप नहीं है उसका ,
पर वो बुलंद है ...!!
मेरी आस में
मेरी सांस में
सोया जागा 
एक तार
विद्यमान है ...
हाँ है ज़रूर ,
मुझमें शांत एकांत 
उतना ही ...
जितना तुममे चंचल प्रबल ...
हाँ
वो है ज़रूर ....!!

23 February, 2015

मान्यताएँ ....(क्षणिकाएं)

मेरी मान्यताओं के धागे
बंधे हैं उससे  ,
समय के साथ ,
समय की क्षणभंगुरता जानते हुए भी,
 वृक्ष नहीं हिलता
अपने स्थान से  ,
बल्कि जड़ें निरंतर
माटी में और सशक्त
और गहरी पैठती चली  जाती हैं !!
आस्था गहराती है ,
छाया और घनी होती जाती है !!

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सदियों से ...
चूड़ी बिछिया पायल पहना ,
बेड़ियों मे जकड़ा ,
अपनों का भार वहन करता
ये कैसा संकोच है ,
निडर ...स्थिर,एकाग्र चित्त ...!!
अम्मा के सर के पल्ले की तरह ........
सरकता नहीं अपनी जगह से कभी ....!!

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बहती धारा से ,
सजल सुबोधित
उम्मीद भरे शब्द
शक्तिशाली होते हैं
प्रभावशाली प्रवाहशाली होते हैं
स्वत्व की चेतना जगा ,
जुडते हैं नदी के प्रवाह से इस तरह
के बहती जाती है नदी
कल कल निनाद के साथ
फिर रुकना  नहीं जानती ........!!
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25 January, 2015

प्रेम तब भी जीवित होगा...!!

मैं शब्द हूँ
नाद ब्रह्म ...
प्रकृति में रचा बसा ...!!
हूँ तो भाव भी हैं
किन्तु ,
न रहूँगा तब भी
भावों का अभाव न होगा !!
प्रतिध्वनित होती रहेगी
गूंज मौन की ,
उस हद से परे भी
प्रकृति की नाद में ,
जल की कल कल में
वायु के वेग में
अग्नि की लौ में  ,
आकाश के विस्तार में,
धृति  के धैर्य में,
रंग में ,बसंत में,
पहुंचेगी मेरी सदा  तुम तक
प्रभास तब भी जीवित होगा
 प्रेम तब भी जीवित होगा...!!

31 December, 2014

चल मन उड़ चल पंख पसार ....!!

शब्द अपने कितने स्वरूपों में
अवतरित ,
खटखते हैं 
मन चेतन द्वार ,
लिए निष्ठा अपार ,
झीरी से फिर चली आती है
धरा के प्राचीर पर
रक्तिम .....
पलाश वन सी .... 
रश्मि  की कतार
नवल वर्ष  प्रबल  विश्वास
सजग  है मन
रचने नैसर्गिक उल्लास,
हँसते मुसकुराते से
 भीति चित्र ,
प्रभात का स्वर्णिम  उत्कर्ष,
शबनमी वर्णिका का स्पर्श ,
एक विस्तृत आकाश का विस्तार ,
बाहें पसार ...
चल मन उड़ चल पंख पसार ....!!
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आप सभी को नव वर्ष 2015 की अनेक अनेक मंगलकामनाएं !!सभी के लिए यह वर्ष शुभ हो ऐसी प्रभु से प्रार्थना है !!